Monday, 2 February 2009

स्वीट हार्ट

तू उठ के रात के १२ बजे , विहस्की रमकी फरियाद न कर
मेरी लुटिया डूब चुकी है ,ऐ इश्क मुझे अब बर्बाद न कर ।

खा के कसमे प्यार की आए यहाँ , गर्दिशों में पेच ढीले हो गए
ढूँढ़ते हम फ़िर हैं नौकरी ,और उनके हाथ पीले हो गए।

लड़की कहाँ से लायूं मैं शादी के वास्ते ,शायद की इसमें मेरे मुकद्दर का दोस्त है,
अजरा,नसीम ,सना ओ सबा भी गई, एक शमा रह गई है वो भी खामोश है।

अर्ज किया है -----------
काश तेरे चेहरे पर चेचक के दाग होते
काश तेरे चेहरे पर चेचक के दाग होते
चाँद तो तू है ही ,सितारे भी साथ होते।
जगदीप गोस्वामी

Wednesday, 21 January 2009

आशिक

आशिक कभी मरते नहीं , जिन्दा दफनाये जाते हैं।
कब्र खोदकर देखो तो, महबूबा के इंतजार मैं पाए जाते हैं।
मुहब्बत के दुश्मन कहते हैं ,की इन्हें जलादों दफ्नादो ।
मगर कोई यों नही कहता कि इसे इसकी महबूबा से मिलादो .

(जगदीप गोस्वामी)

Tuesday, 20 January 2009

मुहब्बत करना किसी के बस में नहीं होता ,
किसी को यादकरके कोई यूं ही नहीं रोता
मिलते हैं बिछ्ढ़ते हैं लाखों चेहरे हर रोज
हर किसी को कोई यादों में नहीं संजोता
हम आपको याद करते हैं , कारन हमें नहीं पता
कब होगा फ़िर से दीदार कहाँ कब बता
सोचता हूँ आज भी ये सब कैसे हुआ
इसमें किसका था दोष और किसकी थी खता
[मुनीश शर्मा]

Yaden

मासूम सी नजर थी ,चेहरा गुलाब था ।
आँखों मैं शायरी थी ,हुस्न लाजबाब था
करती थी सितम मुझ पर ,उसकी हर एक अदा ।
मुस्कान थी निराली , न कोई जबाब था ।
मासूम सी नजर थी -------
अंगडीयां थी लेती तो सिहरन सी दौड़ जाती ,
वो नूर था गुलशन का या कोई शबाव था।
मासूम सी नजर थी -------
(जगदीप गोस्वामी )

Mulakat

समेट्लो सितारों को हाथों में अपने , बहुत दूर तक रात ही रात होगी ।
हम भी मुसाफिर हैं तुम भी मुसाफिर हो ,कही न कही फ़िर मुलाकात होगी .

(जगदीप गोस्वामी )