Tuesday, 20 January 2009

मुहब्बत करना किसी के बस में नहीं होता ,
किसी को यादकरके कोई यूं ही नहीं रोता
मिलते हैं बिछ्ढ़ते हैं लाखों चेहरे हर रोज
हर किसी को कोई यादों में नहीं संजोता
हम आपको याद करते हैं , कारन हमें नहीं पता
कब होगा फ़िर से दीदार कहाँ कब बता
सोचता हूँ आज भी ये सब कैसे हुआ
इसमें किसका था दोष और किसकी थी खता
[मुनीश शर्मा]