मासूम सी नजर थी ,चेहरा गुलाब था ।
आँखों मैं शायरी थी ,हुस्न लाजबाब था
करती थी सितम मुझ पर ,उसकी हर एक अदा ।
मुस्कान थी निराली , न कोई जबाब था ।
मासूम सी नजर थी -------
अंगडीयां थी लेती तो सिहरन सी दौड़ जाती ,
वो नूर था गुलशन का या कोई शबाव था।
मासूम सी नजर थी -------
(जगदीप गोस्वामी )
