Monday, 2 February 2009

स्वीट हार्ट

तू उठ के रात के १२ बजे , विहस्की रमकी फरियाद न कर
मेरी लुटिया डूब चुकी है ,ऐ इश्क मुझे अब बर्बाद न कर ।

खा के कसमे प्यार की आए यहाँ , गर्दिशों में पेच ढीले हो गए
ढूँढ़ते हम फ़िर हैं नौकरी ,और उनके हाथ पीले हो गए।

लड़की कहाँ से लायूं मैं शादी के वास्ते ,शायद की इसमें मेरे मुकद्दर का दोस्त है,
अजरा,नसीम ,सना ओ सबा भी गई, एक शमा रह गई है वो भी खामोश है।

अर्ज किया है -----------
काश तेरे चेहरे पर चेचक के दाग होते
काश तेरे चेहरे पर चेचक के दाग होते
चाँद तो तू है ही ,सितारे भी साथ होते।
जगदीप गोस्वामी