आशिक कभी मरते नहीं , जिन्दा दफनाये जाते हैं। कब्र खोदकर देखो तो, महबूबा के इंतजार मैं पाए जाते हैं। मुहब्बत के दुश्मन कहते हैं ,की इन्हें जलादों दफ्नादो । मगर कोई यों नही कहता कि इसे इसकी महबूबा से मिलादो .
मासूम सी नजर थी ,चेहरा गुलाब था । आँखों मैं शायरी थी ,हुस्न लाजबाब था करती थी सितम मुझ पर ,उसकी हर एक अदा । मुस्कान थी निराली , न कोई जबाब था । मासूम सी नजर थी ------- अंगडीयां थी लेती तो सिहरन सी दौड़ जाती , वो नूर था गुलशन का या कोई शबाव था। मासूम सी नजर थी ------- (जगदीप गोस्वामी )